शबे-बरात के मौके पर इमाम अह़मद रज़ा का पैग़ाम
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*🥀 शबे-बरात के मौके पर इमाम अह़मद रज़ा का पैग़ाम 🥀*
*आ़ला हज़रत इमाम अह़मद रज़ा* रह़मतुल्लाही तआ़ला अ़लैह ने अपने एक अज़ीज़ (दोस्त) को खत लिखा जिस में शबे-बरात से पहले गुनाहों की मग़फिरत और मुसलमानों की आपसी नाराज़गी ख़त्म करने के तआ़ल्लुक़ से बहेतरीन नसीहत फरमाई
सैयदना आला-हज़रत ने फ़रमाया
*"शबे-बरात क़रीब है, इस रात तमाम बंदों के आ़माल अल्लाह रब्बुल इ़ज़्ज़त की बारगाह में पेश होते हैं मौला अ़ज़ज़ा व जल, नबी ए करीम सलल्लाहू तआ़ला अ़लैही व सल्लम के तुफ़ैल मुसलमानों के गुनाहों को माफ फरमाता है मगर कुछ उन में वह दो/ मुसलमान जो आपस में दुनियावी वजह से नाराज़गी रख़्ते हैं फरमाता है उनको रहने दो जब तक आपस में सुलह़ न कर लें लेहाज़ा अहले सुन्नत को चाहिए के जहां तक हो सके, 14 शाबान को ग़ुरूबे आफताब से पहले आपस में एक दूसरे से सफ़ाई कर लें, एक दूसरे के ह़ूक़ूक़ अ़दा कर दें या मुआ़फ करा लें* कि अल्लाह तआ़ला के ह़ूक्म से ह़ूक़ूक़ुल ई़बाद से आ़माल नामे ख़ाली हो कर रब कि बारगाह में पेश हों
अल्लाह तआ़ला के ह़ूक़ूक़ के लिए सच्ची त़ौबा काफी है ह़दीसे पाक में है कि गुनाह से त़ौबा करने वाला ऐसा है जैसे उसने गुनाह किया ही नहीं ऐसी हालत में अल्लाह के फझ़्ल से ज़रूर इस रात कामिल मग़फिरत की उम्मीद है, *बशर्ते सेह़ते अ़क़िदा (यानी अकीदा सही होना शर्त़ है) और वह गुनाह मिटाने वाला रह़मत फरमाने वाला है*
*इस त़रह़ मुसलमानों में सुलह़ करवाना और ह़ूक़ूक़ माफ करवाना अल्लाह तआ़ला के फज़लो करम से यहां कई सालों से जारी है उम्मीद है* के आप भी वहां के मुसलमानों में इस कि शुरुआ़त करके इस ह़दिस़ के मिस्दाक़ बनेंगे के जो इस्लाम में अच्छी राह निकाले, उसके लिए उसका स़वाब है और क़यामत तक जो उस पर अ़मल करें उन सब का स़वाब हमेशा उसके नामा ए आ़माल में लिख़ा जाए, बग़ैर इसके के उनके स़वाबों में कुछ कमी आए और इस फक़ीर के लिए अ़फू व आ़फियते दारैन कि दुआ़ फरमाएं फक़ीर आपके लिए दुआ़ करता है और करेगा सब मुसलमानों को समझा दिया जाए के वहां य़ानी बरगाहे ईलाही में न ख़ाली ज़बान देख़ी जाती है न निफाक़ पसंद है सुलह़ व माफी सब सच्चे दिल से हो"
*✍️ सय्यदना आ़ला हज़रत का यह इरशाद जिसको आसान ज़बान में पेश किया गया, इससे शबे-बरात के मौक़ा पर मुसलमानों की आपसी नाराज़गी ख़त्म करने और ह़ूक़ूक़ुल ई़बाद को माफ करवाने की अहमियत का पता चलता है और यह भी समझ में आता है के एक दूसरे से माफी तलाफी सब सच्चे दिल से होना चाहिए, और शबे-बरात के मौक़ा पर हमें लोगों के दरमीयान सुलह़ कराने कि कोशिश करनी चाहिए.*
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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