वो ज़माने में मुअज़्ज़िज़ थे मुसलमाँ हो कर
*بِسْــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ*
*वो ज़माने में मुअज़्ज़िज़ थे मुसलमाँ हो कर*
*और तुम ख़्वार हुए तारिक-ए-क़ुरआँ हो कर*
⚘ माहे शाबान की 15 वी शब “ बस जिसका नफ़्ल रोज़ा जानिब-ए-रिसालत से तलक़ीन किया गया है ” जिसे उर्फ़े आम में शबे बराअत कहा जाता है, अल्लाहﷻ मसलके आला हज़रत ग्रुप वा जुमला अहले इस्लाम को मुबारक़बाद, अल्लाहﷻ आपको और जुमला अहले इस्लाम को इस मुबारक़ शब के तमाम तर रूहानी जिस्मानी, ज़मीनी आसमानी, फ़ैज़-ओ-बरक़ात वा रूमूज़-ओ-असरार और मग़फिरत-ओ-निजात अता फरमाए। अल्लाहुम्मा आमीन बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम बी हक़्की बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम वा बी हक़्क़ी असमाइकल हुस्ना वा सिफ़ातीकल ऊला॥
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