सलतुत्तस्बीह की नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा

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*🥀 सलतुत्तस्बीह की नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा 🥀*



*📿 सलतुत्तस्बीह की नमाज़ की बहुत फ़ज़ीलत है इसके पढ़ने से तमाम अगले पिछले गुनाह माफ हो जाते है और साथ ही बहुत सी फ़ज़ीलत हासिल होती है जो कि लिख कर बता पाना मुमकिन नही चंद फ़ज़ाएल बयान किये जाते हैं बाज़ मुहक्किकीन (बड़े-बड़े उलमा) फरमाते हैं इस नमाज़ की बड़ाई सुन कर तर्क न करेगा मगर दीन में सुस्ती करने वाला*

*🌴नबी ﷺ ने हज़रते अब्बास رضي الله عنه से फरमाया क्या मैं तुमको अता न करूँ क्या मैं तुम को न दूँ क्या तुम्हारे साथ एहसान न करूँ दस ख़सलतें हैं कि जब तुम करो तो अल्लाह तआला ﷻ तुम्हारा गुनाह बख़्श देगा अगला पिछला पुराना नया जो भूल कर किया और जो कस्दन किया छोटा और बड़ा पोशीदा और ज़ाहिर इस के बाद सलाते तस्बीह की तरकीब तअलीम फरमाई फिर फ़रमाया अगर तुमसे हो सके कि हर रोज़ एक बार पढ़ो तो करो और अगर रोज़ न करो तो हर जुमे में एक बार और यह भी न करो तो हर महीने में एक बार और यह भी न करो तो उम्र में एक बार और इसकी तरकीब हमारे तौर पर वह है जो सुनने तिर्मिज़ी शरीफ़ में अब्दुल्लाह इब्ने मुबारक ﷻ की रिवायत से ज़िक्र किया गया है*

*🗣️ नमाज़े सलतुत्तस्बीह की नियत*
*नियत की मैंने चार रकअत नमाज़ नफ़्ल सलतुत्तस्बीह की वास्ते अल्लाह तआला के रुख़ मेरा किब्ला शरीफ़ की तरफ़ अल्लाहु अकबर*

*👉 अब नमाज़ का तरीका*
*इस तरह से नियत बांध लें और अब सना पढ़ें सना पढ़ने के बाद इस तस्बीह को 15 मर्तबा पढ़ें*
*سُبْحَانَ اللّهِ والْحَمْدُللّهِ وَ لا اِلهَ اِلَّا اللّهُ وَ اللّهُ اَكْبَرُ* 
*इसके बाद सूरह फ़ातिहा और सूरह मिलाएं उसके बाद फिर से 10 मर्तबा इस तस्बीह को पढ़ें इसके बाद रुकू में जाएं और रुकू की तस्बीह के बाद 10 मर्तबा फिर से पढ़ें और रुकू से खड़े होकर फिर से 10 मर्तबा पढ़ें इसके बाद सजदे में जाएं और सजदे की तस्बीह के बाद 10 मर्तबा पढ़ें और पहले सजदे उठ बैठें तो उसमें 10 मर्तबा पढ़ें फिर दूसरे सजदे में जा कर सजदे की तस्बीह के बाद 10 मर्तबा इस तरह के एक रकअत में 75 मर्तबा तस्बीह हो जाएगी*

*👇 अब दूसरी रकअत में सूरह फ़ातिहा से पहले 15 मर्तबा पढ़ेंगे बाकी पहली रकअत के जैसे ही पढ़ें अब जब तीसरी रकअत के लिए खड़े हों तो फिर से पहले सना पढ़ें उसके बाद 15 मर्तबा पढ़ें फिर उसके बाद सूरह फ़ातिहा पढ़ें इस तरह से चार रकअत पढ़ें और सलाम फेरने के बाद दुआ व अस्तग़फ़ार करें*

*✍️ कुछ मुख़्तलिफ़ मसाएल*
*इब्ने अब्बास رضي الله عنه से पूछा गया कि आप को मालूम है इस नमाज़ में कौन सूरत पढ़ी जाये फरमाया सूरए तकासुर और सूरए अस्र और قُلْ یٰۤاَیُّهَا الْكٰفِرُوْنَ और قُلْ هُوَ اللّٰهُ बाज़ ने कहा सूरए हदीद और हश्र और सफ और तगाबुन*
*अगर सजदए सहव वाजिब हो और सजदा करे तो इन दोनों में तस्बीहात न पढ़ी जायें और अगर किसी जगह भूल कर दस बार से कम पढ़ी हैं तो दूसरी जगह पढ़ ले कि वह मिकदार पूरी हो जाये और बेहतर यह है कि उसके बाद जो दूसरा मौका तस्बीह का आये वहीं पढ़ ले कौमा की सजदे में कहे और रुकू में भूला तो उसे भी सजदा ही में कहे न क़ौमा में कि मिक़दार थोड़ी होती है और पहले सजदे में भूला तो दूसरी में कहे जलसे में नहीं तस्बीह उंगलियों पर न गिने बल्कि हो सके तो दिल में शुमार करे वर्ना उंगलियाँ दबाकर हर गैर मकरूह वक़्त में यह नमाज़ पढ़ सकता है और बेहतर यह है कि ज़ोहर से पहले पढे*



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